Sunday, 1 January 2012

HAPPY NEW YEAR............2012 TO ALL

HAPPY NEW YEAR 2012 TO ALL OF YOU.............................



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DEEPAK 

अजब गजब







पिछले भाग का शेष.......................................


फ्रंट में रिजिड लेंस, उसके पीछे फ्लेक्सिबल लेंस, और सबसे पीछे आप्टिकली न्यूट्रल लेंस लगे हुए है | फ्लेक्सिबल लेंस और न्यूट्रल लेंस के बीच में ओप्तिकली क्लीयर फ्लूइड डाला गया है | इस फ्लूइड को बाहर
और अंदर की तरफ पम्प करने से यूजर्स फ्लेक्सिबल लेंस की शेप चेंज कर सकते है, जिससे आईग्लास का फोकस बदलने में मदद मिलती है | ये नया लेंस - 4 डिग्री सेल्सियस से 52 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में बखूबी काम कर सकता है | इसका वजन आम ग्लासेस के जितना ही होता है | इसकी कीमत 898 डालर तय की गयी है |




दीपक  

Sunday, 4 December 2011

अजब गजब

बायफोकल या ट्रायफोकल चश्मे पहनने वाले लोग समझ सकते है कि इन चश्मों में से कोई भी चीज देखने के लिए सर को बार बार ऊपर नीचे करना पड़ता है | इससे कई बार सर दर्द या फिर अन्य समस्याएँ हो जाती है | हल ही में  ' ट्रूफोकल्स ' ने कुछ ऐसे लेंस बनाएं है जिसमे एक ही ग्लास में दूर, पास, मिड विजन की सुविधा पाई जाती है | इसकी खासियत ये है कि इसमें किसी भी तरह के अलग - अलग फोकल क्षेत्र नहीं है मतलब एक ही लेंस में ये सारी खूबियाँ है | इसमें हर आखों के लिए तीन ओप्टिकल सर्फेस है |

आगे और भी है..............................................


दीपक 

Tuesday, 15 November 2011

JOKES






संता – अरे यार …. ये मोबाइल तो मुझे कंगाल कर देगा …!
बंता – क्यों ? क्या हुआ ?
संता – बार-बार दिखाता है – बैटरी लो (battery low), और मैं अब तक 56 बैटरी बदल चुका हूँ !!!
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शेर शेरनी का चुम्बन लेने लगा तो शेरनी ने रोक दिया और इधर-उधर देखने लगी.
शेर – क्या हुआ ?
शेरनी – देख रही हूँ कहीं आसपास डिस्कवरी वाले तो नहीं हैं ….. !!!
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डैडी : बेटे, मैंने दूसरा सिम कार्ड लिया है, नंबर नोट कर लो 99…
बेटा : ओके डैड, सेव कर लिया.
डैडी : किस नाम से सेव किया ?
बेटा : डैडी नं. 2 …!!!
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मरीज - डॉक्टर साहब, जब मैं चाय पीता हूँ, मेरी आँख  में  दर्द  होता  है.
डॉक्टर - कल से चाय पीते समय कप में से चम्मच निकाल लिया करो … !
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संता को सपने में लड़की ने चप्पल से मारा.
अगले 2 दिनों तक संता अपने बैंक नहीं गया, क्योंकि वहाँ लिखा था -
“हम आपके सपने को हकीकत में बदलते हैं.”





दीपक 

Monday, 3 October 2011

क्रोध है अभिशाप

 


आज समझते हैं कि क्रोध आपकी कितनी निजी हानि करता है। कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर उत्तेजित हो जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पडऩा। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का।

लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

अगर आप बार-बार गुस्सा करते हैं तो सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे संबंध भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। फिर जाता है हमारा सम्मान।

अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जा रहे हैं।  इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। फिर स्वभाव और स्वास्थ्य। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है।

समाधान में चलते हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें। कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें। सही समय का इंतजार करें। कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। शिशुपाल अपमान करता रहा लेकिन वे सही वक्त का इंतजार करते रहे। वक्त आने पर ही उन्होंने शिशुपाल को मारा।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।







दीपक