Sunday, 4 December 2011

अजब गजब

बायफोकल या ट्रायफोकल चश्मे पहनने वाले लोग समझ सकते है कि इन चश्मों में से कोई भी चीज देखने के लिए सर को बार बार ऊपर नीचे करना पड़ता है | इससे कई बार सर दर्द या फिर अन्य समस्याएँ हो जाती है | हल ही में  ' ट्रूफोकल्स ' ने कुछ ऐसे लेंस बनाएं है जिसमे एक ही ग्लास में दूर, पास, मिड विजन की सुविधा पाई जाती है | इसकी खासियत ये है कि इसमें किसी भी तरह के अलग - अलग फोकल क्षेत्र नहीं है मतलब एक ही लेंस में ये सारी खूबियाँ है | इसमें हर आखों के लिए तीन ओप्टिकल सर्फेस है |

आगे और भी है..............................................


दीपक 

Tuesday, 15 November 2011

JOKES






संता – अरे यार …. ये मोबाइल तो मुझे कंगाल कर देगा …!
बंता – क्यों ? क्या हुआ ?
संता – बार-बार दिखाता है – बैटरी लो (battery low), और मैं अब तक 56 बैटरी बदल चुका हूँ !!!
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शेर शेरनी का चुम्बन लेने लगा तो शेरनी ने रोक दिया और इधर-उधर देखने लगी.
शेर – क्या हुआ ?
शेरनी – देख रही हूँ कहीं आसपास डिस्कवरी वाले तो नहीं हैं ….. !!!
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डैडी : बेटे, मैंने दूसरा सिम कार्ड लिया है, नंबर नोट कर लो 99…
बेटा : ओके डैड, सेव कर लिया.
डैडी : किस नाम से सेव किया ?
बेटा : डैडी नं. 2 …!!!
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मरीज - डॉक्टर साहब, जब मैं चाय पीता हूँ, मेरी आँख  में  दर्द  होता  है.
डॉक्टर - कल से चाय पीते समय कप में से चम्मच निकाल लिया करो … !
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संता को सपने में लड़की ने चप्पल से मारा.
अगले 2 दिनों तक संता अपने बैंक नहीं गया, क्योंकि वहाँ लिखा था -
“हम आपके सपने को हकीकत में बदलते हैं.”





दीपक 

Monday, 3 October 2011

क्रोध है अभिशाप

 


आज समझते हैं कि क्रोध आपकी कितनी निजी हानि करता है। कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर उत्तेजित हो जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पडऩा। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का।

लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

अगर आप बार-बार गुस्सा करते हैं तो सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे संबंध भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। फिर जाता है हमारा सम्मान।

अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जा रहे हैं।  इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। फिर स्वभाव और स्वास्थ्य। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है।

समाधान में चलते हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें। कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें। सही समय का इंतजार करें। कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। शिशुपाल अपमान करता रहा लेकिन वे सही वक्त का इंतजार करते रहे। वक्त आने पर ही उन्होंने शिशुपाल को मारा।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।







दीपक 

Saturday, 17 September 2011

अजब गजब


अफ्रिका के आंद्रेयास फ्रोएजे ने दुनिया को प्रदूषण से बचाने के लिए ऐसे घर का निर्माण किया है जो प्लास्टिक से होने वाली पर्यावरण समस्या और भूकंप से लोगों की रक्षा करेगा। इस घर का निर्माण प्लास्टिक की बोतलों से किया गया है।
हर साल दुनिया में उपयोग में आने वाला 80 फीसदी प्लास्टिक बहकर समुद्र में पहुंच जाता है। प्लास्टिक की बोतलों को गलकर समाप्त होने में सैकड़ों साल लगते हैं। लेकिन आंद्रेयास फ्रोएजे का कहना है कि बेकार सा लगता यह कूड़ा मूल्यवान संसाधन हो सकता है।
इससे घर का निर्माण कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है। घर बनाने के लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों को बालू या राख से भरकर एक दूसरे के ऊपर जमा कर दिया जाता है और फिर गारे से चुन दिया जाता है। इस ढांचे को नाइलोन की रस्सी से पक्का किया जाता है ताकि वह गिरे नहीं।
आंद्रेयास फ्रोएजे प्रशिक्षित राजमिस्त्री हैं और इस तरह से वह पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं1 साथ ही गरीबी में रहने वाले लोगों को घर मुहैयार कराना चाहते हैं।
इन्‍होंने इको-टेक नाम की एक कंपनी बनाई है। इनकी कंपनी दुनिया भर में प्लास्टिक के करीब 50 मकान बनाए चुकी है। वे 7.3 की तीव्रता वाले भूकंप को भी झेलने में भी सक्षम है। उन्‍होंने दावा किया है कि प्लास्टिक की बोतल सामान्य ईंट से ज्यादा बोझ और धक्का सह सकती है।





है न कमाल..........................................




दीपक 

Friday, 26 August 2011

अजब गजब


जापानी इंजीनियरों ने एक ऐसी कार तैयार कर ली है जो पेट्रोल-डीजल  के बजाय पानी से  चलेगी ।  एक लीटर पानी से यह कार एक घंटे चलेगी और इसकी रफ्तार 80 किलोमीटर तक रहेगी। इसके लिए कोई भी पानी यानी नदी, तालाब या यहां तक कि समुद्र का पानी भी चलेगा। इंजिन पर रखे बोतल में जब तक पानी रहेगा तब तक कार दौड़ती रहेगी।यह कार मूल रूप से बिजली से चलती है और यह बिजली पानी से बनती है।

इसके लिए बैटरी को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं है। पानी कार के अंदर जब जाता है तो वहां एक टैंक में लगा जेनरेटर उसे खंडित करता है जिससे बिजली बनती है। जेनपेक्स के सीईओ कियोशी हिरास्वा ने यह तोक्यो टीवी को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया गया है।

है न कमाल...................................................



दीपक 



Sunday, 24 July 2011

क्या आप जानते है ????????








कई बार ऐसा होता है कि हम मन लगाकर ईमानदारी से अपना काम करते हैं इसके बाद भी हमारी तरक्की नहीं होती। जबकि जो व्यक्ति कई मामलों में हमसे कमतर होता है, उसकी तरक्की जल्दी हो जाती है। ऐसी स्थिति में हम खुद को ठगा हुआ सा महसूस करते हैं और अपने मालिक के प्रति घ्रणा से भर जाते हैं।

आइये चलते हैं एक सुन्दर सी कथा की ओर, जो काम और तरक्की के बीच के संबंधों और बारीक कारणों से पर्दा उठाती है...

किसी गांव में हरिया नाम का एक लकड़हारा रहता था। वह अपने मालिक के लिए रोज जंगल से लकडिय़ां काटकर लाता था। यह काम करते हुए उसे पांच साल हो चुके थे लेकिन मालिक ने न तो कभी उसकी तारीफ की और न ही वेतन बढ़ाया। थोड़े दिनों बाद उसके मालिक ने जंगल से लकडिय़ां काटकर लाने के लिए बुधिया नाम के एक और लकड़हारे को भी नौकरी दे दी। बुधिया अपने काम में बड़ा माहिर था। वह हरिया से ज्यादा लकडिय़ां काटकर लाता था। एक साल के अंदर ही मालिक ने उसका वेतन बढ़ा दिया। यह देखकर हरिया बहुत दु:खी हुआ और मालिक से इसका कारण पूछा।

मालिक ने कहा कि पांच साल पहले तुम जितने पेड़ काटते थे आज भी उतने ही काटते हो। तुम्हारे काम में कोई फर्क नहीं आया है जबकि बुधिया तुमसे ज्यादा पेड़ काटकर लाता है। यदि तुम भी कल से ज्यादा पेड़ काटकर लाओगे तो तुम्हारा वेतन भी बढ़ जाएगा। हरिया ने सोचा कि बुधिया भी उतनी ही देर काम करता थे जितनी देर मैं। तो भी वह ज्यादा पेड़ कैसे काट लेता है। यह सोचकर वह बुधिया के पास गया और उससे इसका कारण पूछा। बुधिया ने बताया कि वह कल काटने वाले पेड़ को एक दिन पहले ही चुन लेता है ताकि दूसरे दिन इस काम में वक्त खराब न हो। इसके अलावा रोज कुल्हाड़ी में धार भी करता है इससे पेड़ जल्दी कट जाते हैं और कम समय में ज्यादा काम हो जाता है।





 कुछ समझे...................................................


दीपक