Wednesday, 3 November 2010

अजब-गजब

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क्या आप नाली का पानी इस्तेमाल में ला सकते है ???????????????..........................नहीं ना...................पर ये संभव किया है ओस्लो के canstetin bainsiyan, relf bertrem, और exelsender denilek ने | इन्होने मशरूम आकार का 'सोलर इवेपोरेटर' तैयार किया है, जिसकी मदद से सीवेज के पानी को साफ किया जा सकेगा | ये छाते की आकृति का है और ये सौर वाष्पीकरण की मदद से सीवेज के काले पानी को साफ कर देगा | इस पानी से आस पास के पेड पौधों को सींचा जायेगा | इससे यह बेकार पानी भी काम में आ जायेगा और और शहरों में हरियाली भी बरक़रार रहेगी | 


आगे और भी है....................................................................


दीपक 

Sunday, 31 October 2010

इंदिरा गाँधी के मृत्यु दिवस पर विशेष



उड़ीसा में जबरदस्त चुनाव प्रचार के बाद इंदिरा गांधी 30 अक्टूबर की शाम दिल्ली पहुंची थीं। आमतौर पर जब वो दिल्ली में रहती थीं तो उनके घर एक सफदरजंग रोड पर जनता दरबार लगाया जाता था। लेकिन ये भी एक अघोषित नियम था कि अगर इंदिरा दूसरे शहर के दौरे से देर शाम घर पहुंचेंगी तो अगले दिन जनता दरबार नहीं होगा। 30 तारीख की शाम को भी इंदिरा से कहा गया कि वो अगले दिन सुबह के कार्यक्रम रद्द कर दें। लेकिन इंदिरा ने मना कर दिया। वो आइरिश फिल्म डायरेक्टर पीटर उस्तीनोव को मुलाकात का वक्त दे चुकी थीं।

एसीपी दिनेश चंद्र भट्ट बताते हैं कि जैसे एक नॉर्मल तरीका होता है। सुबह उठकर आप जनता से मिलते हैं तो उस दिन एक बिजी शिड्यूल था। उनके इंटरव्यू के लिए बाहर से एक टीम आई हुई थी। पीटर उस्तीनोव आए। उन लोगों ने अपना सर्वे किया। ये देखा कि खुली जगह पर इंटरव्यू करना चाहिए। वहां दीवाली के पटाखे पड़े हुए थे। उसको साफ-वाफ करवा कर वैसा इंतजाम करवाया गया तो उसमें कुछ वक्त लग रहा था। 
दरअसल पीटर इंदिरा गांधी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बना रहे थे। इस बीच सुबह के आठ बजे इंदिरा गांधी के निजी सचिव आर के धवन एक सफदरजंग रोड पहुंच चुके थे। धवन जब इंदिरा गांधी के कमरे में गए तो वो अपना मेकअप करा रही थीं। इंदिरा ने पलटकर उन्हें देखा। दीवाली के पटाखों को लेकर थोड़ी नाराजगी भी दिखाई और फिर अपना मेकअप पूरा कराने में लग गईं।
अब तक घड़ी ने 9 बजा दिए थे। लॉन भी साफ हो चुका था और इंटरव्यू के लिए सारी तैयारियां भी पूरी थीं। चंद मिनटों में ही इंदिरा एक अकबर रोड की तरफ चल पड़ीं। यहीं पर पेंट्री के पास मौजूद था हेड कॉन्सटेबल नारायण सिंह। नारायण सिंह की ड्यूटी आइसोलेशन कैडर में होती थी। साढ़े सात से लेकर 8.45 तक पोर्च में ड्यूटी करने के बाद वो कुछ देर पहले ही पेंट्री के पास आकर खड़ा हुआ था। इंदिरा को सामने से आते देख उसने अपनी घड़ी देखी। वक्त हुआ था 9 बजकर 05 मिनट। आर के धवन भी उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। दूरी करीब तीन से चार फीट रही होगी। तभी वहां से एक वेटर गुजरा। उसके हाथ में एक कप और प्लेट थी। वेटर को देखकर इंदिरा थोड़ा ठिठकीं। पूछा कि ये कहां लेकर जा रहे हो। उसने जवाब दिया इंटरव्यू के दौरान आइरिश डायरेक्टर एक-टी सेट टेबल पर रखना चाहते हैं। इंदिरा ने उस वेटर को तुरंत कोई दूसरा और अच्छा टी-सेट लेकर आने को कहा। ये कहते हुए ही इंदिरा आगे की ओर बढ़ चलीं। ड्यूटी पर तैनात हेड कॉन्सटेबल नारायण सिंह के साथ छाता लेकर उनके साथ हो लिया।
तेज कदमों से चलते हुए इंदिरा उस गेट से करीब 11 फीट दूर पहुंच गई थीं जो एक सफदरजंग रोड को एक अकबर रोड से जोड़ता है। नारायण सिंह ने देखा कि गेट के पास सब इंस्पेक्टर बेअंत सिंह तैनात था। ठीक बगल में बने संतरी बूथ में कॉन्सटेबल सतवंत सिंह अपनी स्टेनगन के साथ मुस्तैद खड़ा था।
आगे बढ़ते हुए इंदिरा गांधी संतरी बूथ के पास पहुंची। बेअंत और सतवंत को हाथ जोड़ते हुए इंदिरा ने खुद कहा-नमस्ते। उन्होंने क्या जवाब दिया ये शायद किसी को नहीं पता लेकिन बेअंत सिंह ने अचानक अपने दाईं तरफ से .38 बोर की सरकारी रिवॉल्वर निकाली और इंदिरा गांधी पर एक गोली दाग दी। आसपास के लोग भौचक्के रह गए। सेकेंड के अंतर में बेअंत सिंह ने दो और गोलियां इंदिरा के पेट में उतार दीं। तीन गोलियों ने इंदिरा गांधी को जमीन पर झुका दिया। उनके मुंह से एक ही बात निकली-ये क्या कर रहे हो। इस बात का भी बेअंत ने क्या जवाब दिया ये शायद किसी को नहीं पता।
लेकिन तभी संतरी बूथ पर खड़े सतवंत की स्टेनगन भी इंदिरा गांधी की तरफ घूम गई। जमीन पर नीचे गिरती हुई इंदिरा गांधी पर कॉन्सटेबल सतवंत सिंह ने एक के बाद एक गोलियां दागनी शुरु कीं। लगभग हर सेकेंड के साथ एक गोली। एक मिनट से कम वक्त में सतवंत ने अपनी स्टेन गन की पूरी मैगजीन इंदिरा गांधी पर खाली कर दी। स्टेनगन की तीस गोलियों ने इंदिरा के शरीर को भूनकर रख दिया।
आर के धवन बताते हैं कि उस वक्त भी मैं उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा था। इंदिरा जी भी नीचे देख रही थीं। मैं भी नीचे देखकर चल रहा था। बात कर रहे थे। जैसे ही सिर उठाया तो देखा बेअंत सिंह जो गेट पर था उसने अपनी रिवॉल्वर से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलियां चलनी शुरू हुईं तो इंदिरा जी उसी वक्त जमीन पर गिर गईं। तभी सतवंत सिंह ने गोलियों की बौझार शुरु कर दी। जब वो दृश्य मेरे सामने आता है तो दिमाग पागल हो जाता है।

मेरी ओर से इंदिरा गाँधी को श्रद्धांजलि..........................................................    


दीपक 

अजब गजब

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक प्राथमिक स्कूल ऐसा भी है जो कब्रिस्तान में चलता है। यहां जब भी शव को दफनाने के लिए लाया जाता है तो स्कूल में छुट्टी कर दी जाती है। समाचार पत्र 'द न्यूज इंटरनेशनल' में मंगलवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक स्कूल में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थियों को जब कभी प्यास लगती है तो वे नजदीक घरों में जाकर पानी पीते हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी नसीम अख्तर ने बताया कि सरकारी एम.जी. बालिका प्राथमिक विद्यालय को जमीन मुहैया नहीं हो सकी है, जहां इसे बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि यहां जब भी कोई शव दफनाने के लिए लाया जाता है तो हमें विद्यार्थियों को छुट्टी देनी पड़ती है।




दीपक 

Saturday, 30 October 2010

बुजुर्ग है या जवान...................????????????

स्कायड्राइविंग का नाम सुनते ही पसीना छुट जाता है, लेकिन 97 वर्षीय ज्योर्ज मोयसे को रोमांच से खेलना बहुत पसंद है | उनकी उम्र पर ना जाएँ, क्योंकि वे अपने पोते एडवर्ड ब्रिवर (43 वर्ष), के साथ स्काईड्राइविंग करते है | उन्होंने 10,000 फीट से छलांग लगाई है और पहले 5000 फीट तक 120 मिल प्रति घंटा का दबाव सहन किया है |      


दीपक 

Wednesday, 27 October 2010

बुजुर्ग है या जवान...................????????????


उनकी उम्र 100 साल है | वे पिछले 60 सालो से प्रक्टिस कर रहे है | उन्होंने 18000 से ज्यादा प्रसव करे है | उनको प्यार से लोग पापा डॉक कहते है  | ये है डॉ. वाल्टर वाट्सन | अमेरिका के जार्जिया प्रान्त के औगुस्ता में रहने वाले डॉ. वाट्सन दुनिया  के सबसे  बुजुर्ग डॉक्टर माने जाते है | उनकी एक मरीज है जिनका नाम साब्रा, जिनके घर के  17  सदस्यों के वाट्सन ने किये है | उनकी (साब्रा) उम्र  77 साल  है |


दीपक     

Tuesday, 26 October 2010

बुजुर्ग है या जवान...................????????????



माना जाता है कि ज्योर्जिया के सुदूर गांव में रहने वाली एंटीस क्विचावा दुनियाँ कि सबसे अथिक उम्र कि जीवित महिला है | इनका जन्म 8 जुलाई 1880 में हुआ था और इस तरह से वे अब 130 वर्ष की है | वे पूरी तरह से निरक्षर हैं लेकिन 85 वर्ष की उम्र तक सक्रिय रूप से चाय के बागानों से पत्तियां तोड़ने का काम करती रही | वे अपने 40 वर्षीय पडपोते के साथ रहती है |


दीपक 

Monday, 25 October 2010

जोक्स

१) नवविवाहित जोंडा जब हनीमून मनाने के लिए हिल स्टेशन के एक होटल में पंहुचा तो मैनजेर ने दूल्हे को देखते ही 
   उसका नाम रजिस्टर में लिख दिया।
   दुल्हन ने खुशी के मारे मैनेजर से पूछा- क्या मेरे पति इतने मशहूर है कि आपकों उनका नाम-पता पूछने की जरूरत ही नही 
   पडी बात असल में यह है देवीजी मैनेजर ने कहा-आपके पति हमारे होटल में हर वर्ष हनीमून मनाने आते है।
२) संता- कल पडोसन मेरे सपने में आई थी।
    पत्नी- अकेली आई होगी।
    संता- तुम्हे कैसे पता।
    पत्नी- उसका पति तो मेरे सपनों में आया था।
३) बंता अपने मित्र से बोला , मेरी पत्नी को मेरा कितना दर्द है।
    रात को मैने उससे कहा कि गर्म, पानी कर दो उसने तुंरत गर्म पानी कर दिया।
    तो क्या हुआ पर तुमने उसे गर्म पानी करने की तकलीफ क्यों दी। इसलिए कि मैं ठंडे पानी से बरतन नहीं धो सकता।
४) पति महोदय उदास बैठे थे लेकिन पत्नी अपनी ही हांके जा रही थी।
    अचानक पत्नी ने पूछा- अच्छा यह तो बताओं कि वह कौन सी चीज है, जो मर्दो को तो पसंद है पर औरतों को नही।
    खामोशी पति ने गहरी सांस लेते हुए कहा।

    कौन कहता है की गम को भुलाने की दावा शराब होती है, जोक्स पढिये और गम भूल जाईये |   

  

दीपक