Sunday, 4 December, 2011

अजब गजब

बायफोकल या ट्रायफोकल चश्मे पहनने वाले लोग समझ सकते है कि इन चश्मों में से कोई भी चीज देखने के लिए सर को बार बार ऊपर नीचे करना पड़ता है | इससे कई बार सर दर्द या फिर अन्य समस्याएँ हो जाती है | हल ही में  ' ट्रूफोकल्स ' ने कुछ ऐसे लेंस बनाएं है जिसमे एक ही ग्लास में दूर, पास, मिड विजन की सुविधा पाई जाती है | इसकी खासियत ये है कि इसमें किसी भी तरह के अलग - अलग फोकल क्षेत्र नहीं है मतलब एक ही लेंस में ये सारी खूबियाँ है | इसमें हर आखों के लिए तीन ओप्टिकल सर्फेस है |

आगे और भी है..............................................


दीपक 

Tuesday, 15 November, 2011

JOKES






संता – अरे यार …. ये मोबाइल तो मुझे कंगाल कर देगा …!
बंता – क्यों ? क्या हुआ ?
संता – बार-बार दिखाता है – बैटरी लो (battery low), और मैं अब तक 56 बैटरी बदल चुका हूँ !!!
.....................................................................................................................................
शेर शेरनी का चुम्बन लेने लगा तो शेरनी ने रोक दिया और इधर-उधर देखने लगी.
शेर – क्या हुआ ?
शेरनी – देख रही हूँ कहीं आसपास डिस्कवरी वाले तो नहीं हैं ….. !!!
......................................................................................................................................
डैडी : बेटे, मैंने दूसरा सिम कार्ड लिया है, नंबर नोट कर लो 99…
बेटा : ओके डैड, सेव कर लिया.
डैडी : किस नाम से सेव किया ?
बेटा : डैडी नं. 2 …!!!
.......................................................................................................................................
मरीज - डॉक्टर साहब, जब मैं चाय पीता हूँ, मेरी आँख  में  दर्द  होता  है.
डॉक्टर - कल से चाय पीते समय कप में से चम्मच निकाल लिया करो … !
.......................................................................................................................................
संता को सपने में लड़की ने चप्पल से मारा.
अगले 2 दिनों तक संता अपने बैंक नहीं गया, क्योंकि वहाँ लिखा था -
“हम आपके सपने को हकीकत में बदलते हैं.”





दीपक 

Monday, 3 October, 2011

क्रोध है अभिशाप

 


आज समझते हैं कि क्रोध आपकी कितनी निजी हानि करता है। कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर उत्तेजित हो जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पडऩा। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का।

लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

अगर आप बार-बार गुस्सा करते हैं तो सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे संबंध भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। फिर जाता है हमारा सम्मान।

अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जा रहे हैं।  इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। फिर स्वभाव और स्वास्थ्य। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है।

समाधान में चलते हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें। कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें। सही समय का इंतजार करें। कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। शिशुपाल अपमान करता रहा लेकिन वे सही वक्त का इंतजार करते रहे। वक्त आने पर ही उन्होंने शिशुपाल को मारा।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।







दीपक 

Saturday, 17 September, 2011

अजब गजब


अफ्रिका के आंद्रेयास फ्रोएजे ने दुनिया को प्रदूषण से बचाने के लिए ऐसे घर का निर्माण किया है जो प्लास्टिक से होने वाली पर्यावरण समस्या और भूकंप से लोगों की रक्षा करेगा। इस घर का निर्माण प्लास्टिक की बोतलों से किया गया है।
हर साल दुनिया में उपयोग में आने वाला 80 फीसदी प्लास्टिक बहकर समुद्र में पहुंच जाता है। प्लास्टिक की बोतलों को गलकर समाप्त होने में सैकड़ों साल लगते हैं। लेकिन आंद्रेयास फ्रोएजे का कहना है कि बेकार सा लगता यह कूड़ा मूल्यवान संसाधन हो सकता है।
इससे घर का निर्माण कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है। घर बनाने के लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों को बालू या राख से भरकर एक दूसरे के ऊपर जमा कर दिया जाता है और फिर गारे से चुन दिया जाता है। इस ढांचे को नाइलोन की रस्सी से पक्का किया जाता है ताकि वह गिरे नहीं।
आंद्रेयास फ्रोएजे प्रशिक्षित राजमिस्त्री हैं और इस तरह से वह पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं1 साथ ही गरीबी में रहने वाले लोगों को घर मुहैयार कराना चाहते हैं।
इन्‍होंने इको-टेक नाम की एक कंपनी बनाई है। इनकी कंपनी दुनिया भर में प्लास्टिक के करीब 50 मकान बनाए चुकी है। वे 7.3 की तीव्रता वाले भूकंप को भी झेलने में भी सक्षम है। उन्‍होंने दावा किया है कि प्लास्टिक की बोतल सामान्य ईंट से ज्यादा बोझ और धक्का सह सकती है।





है न कमाल..........................................




दीपक 

Friday, 26 August, 2011

अजब गजब


जापानी इंजीनियरों ने एक ऐसी कार तैयार कर ली है जो पेट्रोल-डीजल  के बजाय पानी से  चलेगी ।  एक लीटर पानी से यह कार एक घंटे चलेगी और इसकी रफ्तार 80 किलोमीटर तक रहेगी। इसके लिए कोई भी पानी यानी नदी, तालाब या यहां तक कि समुद्र का पानी भी चलेगा। इंजिन पर रखे बोतल में जब तक पानी रहेगा तब तक कार दौड़ती रहेगी।यह कार मूल रूप से बिजली से चलती है और यह बिजली पानी से बनती है।

इसके लिए बैटरी को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं है। पानी कार के अंदर जब जाता है तो वहां एक टैंक में लगा जेनरेटर उसे खंडित करता है जिससे बिजली बनती है। जेनपेक्स के सीईओ कियोशी हिरास्वा ने यह तोक्यो टीवी को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया गया है।

है न कमाल...................................................



दीपक 



Sunday, 24 July, 2011

क्या आप जानते है ????????








कई बार ऐसा होता है कि हम मन लगाकर ईमानदारी से अपना काम करते हैं इसके बाद भी हमारी तरक्की नहीं होती। जबकि जो व्यक्ति कई मामलों में हमसे कमतर होता है, उसकी तरक्की जल्दी हो जाती है। ऐसी स्थिति में हम खुद को ठगा हुआ सा महसूस करते हैं और अपने मालिक के प्रति घ्रणा से भर जाते हैं।

आइये चलते हैं एक सुन्दर सी कथा की ओर, जो काम और तरक्की के बीच के संबंधों और बारीक कारणों से पर्दा उठाती है...

किसी गांव में हरिया नाम का एक लकड़हारा रहता था। वह अपने मालिक के लिए रोज जंगल से लकडिय़ां काटकर लाता था। यह काम करते हुए उसे पांच साल हो चुके थे लेकिन मालिक ने न तो कभी उसकी तारीफ की और न ही वेतन बढ़ाया। थोड़े दिनों बाद उसके मालिक ने जंगल से लकडिय़ां काटकर लाने के लिए बुधिया नाम के एक और लकड़हारे को भी नौकरी दे दी। बुधिया अपने काम में बड़ा माहिर था। वह हरिया से ज्यादा लकडिय़ां काटकर लाता था। एक साल के अंदर ही मालिक ने उसका वेतन बढ़ा दिया। यह देखकर हरिया बहुत दु:खी हुआ और मालिक से इसका कारण पूछा।

मालिक ने कहा कि पांच साल पहले तुम जितने पेड़ काटते थे आज भी उतने ही काटते हो। तुम्हारे काम में कोई फर्क नहीं आया है जबकि बुधिया तुमसे ज्यादा पेड़ काटकर लाता है। यदि तुम भी कल से ज्यादा पेड़ काटकर लाओगे तो तुम्हारा वेतन भी बढ़ जाएगा। हरिया ने सोचा कि बुधिया भी उतनी ही देर काम करता थे जितनी देर मैं। तो भी वह ज्यादा पेड़ कैसे काट लेता है। यह सोचकर वह बुधिया के पास गया और उससे इसका कारण पूछा। बुधिया ने बताया कि वह कल काटने वाले पेड़ को एक दिन पहले ही चुन लेता है ताकि दूसरे दिन इस काम में वक्त खराब न हो। इसके अलावा रोज कुल्हाड़ी में धार भी करता है इससे पेड़ जल्दी कट जाते हैं और कम समय में ज्यादा काम हो जाता है।





 कुछ समझे...................................................


दीपक 

Wednesday, 22 June, 2011

अजब गजब

Anime Eyes Clip Art


55 साल के इंतजार के बाद लौटी आंखों की रोशनी

न्यूयार्क। न्यूयार्क में एक ऐसा व्यक्ति है, जिसने 55 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी एक आंख की रोशनी वापस पा ली है। बीबीसी ने 'जर्नल ऑफ मेडिकल केस' में प्रकाशित एक रपट के हवाले से लिखा है कि आठ साल की उम्र में अपनी एक आंख की रोशनी खोने वाले 63 वर्षीय मरीज को फिर से देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
आंख पर पत्थर से चोट लगने के बाद उस व्यक्ति का रेटिना अपनी जगह से हट गया था। इसके बाद उसे दाईं आंख से कुछ दिखाई नहीं देता था। डॉक्टरों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद किसी व्यक्ति को आंखों की रोशनी लौटाने की यह घटना चिकित्सा विज्ञान में पहली बार घटी है।


दीपक  

Sunday, 5 June, 2011

वेडिंग टिप्स





शादी में समय मिले तो सवास्थ पर भी ध्यान दे -


भले ही आप शादी में कितना ही बीजी क्यों न हो पर खानपान, व्यायाम और पूरा आराम लेना जरुरी होता है | इसमें आपको लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए | त्वचा और बालो पर इन सबका बहुत असर पड़ता है | ऐसे समय में आपको पूरी तरह फिट रहना है तो आपको उपरोक्त चीजो पर ध्यान देना जरुरी है | वैसे तो शादी के मौहोल में टाइम मिलना बहुत मुश्किल है पर फिर भी ज्यादा नही तो 10 मिनट तो आपको व्यायाम के लिए निकालने ही चाहिए | अगर गर्मीं में शादी है तो आपको बार बार पानी पीते रहना चाहिए | जिससे आप रिलेक्स महसूस करेंगी | ऐसा नहीं करने से आपकी तबियत भी बिगड़ सकती है |


अन्य टिप्स -

शादी के पहले मेकप का ड्रेस का ट्राई जरुर कर ले | 

अगर आप नयी चीज का इस्तेमाल करने जा रही हो तो उसकी पूरी जानकारी किसी विशेषज्ञ से जरुर ले ले, नहीं तो इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है | 

आपके चेहरे पर नेचुरल उपटन जरुर लगाये |

शादी के समय फ्रेश बने रहें के लिए ज्यूस या नारियल पानी दिन 2 बार ले तो बहुत अच्छा होगा |


दीपक 

Friday, 27 May, 2011

वेडिंग टिप्स

पार्लर में सुकून -

दुल्हन को आराम पार्लर में मिल सकता है | इसलिए ब्यूटी विशेषज्ञ को दुल्हन को मेकअप के साथ कुछ हलके मसाज भी देने चाहिए जैसे तेल की हलकी मालिश और तलवो में मसाज आदि | इससे दुल्हन को रिलेक्स होने का मौका मिलेगा |


नींद पूरी है जरुरी -

शादी के समय दुल्हन की नींद पूरी होनी जरुरी है | इसलिए ये जरुरी है कि जब भी दुल्हन को समय मिले नींद ले लेनी चाहिए | अगर नींद पूरी न हो तो आपकी आखें भारी भारी सी लगती  है और आप अपनी ही शादी को एन्जॉय नहीं कर पाते है | नींद पूरी होने से आपका चेहरा खिला खिला सा लगेगा और आप अपनी शादी को एन्जॉय भी कर पाएँगी | आपका चेहरा ही तो वीडियो, फोटो पे आता है इसलिए भी आपका चेहरा खिला होना जरुरी है |

आगे और भी है.............................................................................



दीपक   

Monday, 16 May, 2011

वेडिंग टिप्स


अपनी केयर स्वयं करें -

शादी के समय अक्सर मेहमानों और रस्मो के बीच दुल्हन की हालत खराब हो जाती है जिसे शायद ही कोई समझ पता है | खूब सारा मेकअप  , भारी भरकम ज्वेलरी साथ ही उनकी डाइट, नींद, उस दिन होने वाला व्रत आदि समस्या होती है | ऐसे में उनको व्यायाम की आदत को नजरंदाज करना उचित नहीं होता है | इस लिए ऐसे समय में या तो दुल्हन या उसके घर वाले कुछ चीजो का ध्यान दे तो बहुत अच्छा होगा | 

यदि आपका व्रत हो तो -

शादी के समय अक्सर दुल्हन और उसके घर वालो को उपवास करने पड़ते है, ऐसे में फल अदि खाते रहें तो अच्छा होगा | पुरे दिन उपवास से आपकी तबियत बिगड़ सकती है | दुल्हन को तो सबसे ज्यादा ध्यान की जरुरत होती है | इन्हें पेय पदार्थ जैसे जिस एनर्जी ड्रिंक, ज्यूस आदी लेती रहें तो अच्छा होगा | इससे वे कमजोर नहीं महसूस करेंगी और उन्हें थोड़ी फ्रेश फील करेंगी |

आगे और भी है...........................................................

दीपक  

Wednesday, 13 April, 2011

ब्यूटी टिप्स


हालांकि डाक्टर इससे सहमत नहीं है | उनका मानना है कि किसी भी धातु में मालिक्युल्स इतने बड़े होते है , कि  

त्वचा उसे सोख पाए ये आसन नहीं होता है | एक सौंदर्य विशेषज्ञ कनिका का मानना है आज कल बाजार में सोने

की  तरह दिखने वाले कई उत्पाद मौजूद है, जिन्हें फेशियल में इस्तेमाल किया जाता है | इस प्रकार के उत्पादक 

आपकी त्वचा  में असर नहीं करते है | ऐसी स्थिति से बचने के लिए गोल्ड, सिल्वर, प्लेटिनम के बारे में जानकारी 

होने पर ही इस्तेमाल करना ठीक होगा | 


दीपक  

Wednesday, 9 March, 2011

ब्यूटी टिप्स

gold facial Gold Facial

गोल्ड फेशियल  -

अक्सर महिलाएं अपनी त्वचा को आकर्षक बनाने के लिए फेशियल करती है | आजकल धातुओ का भी 

इस्तेमाल प्रचलन में है और इन्हें बहुत असरदार व कारगर माना जाता है | इनमे सोने का भी यूज किया जाता 

है | एक्सपर्ट की माने तो सोना सबसे कोमल मेटल माना जाता है जिसे त्वचा जल्दी सोख लेती है | एक्सपर्ट 

शहनाज़ की माने तो ये त्वचा की कोई कोमलता और आकर्षण लौटने में आपकी मदद करता है | साथ ही सोना 

आपको युवा बनाने में भी आपकी मदद करता है | 


आगे और भी है................................................


दीपक 

Thursday, 17 February, 2011

ब्राइडल टिप्स



ज्यादातर दुल्हने हैण्डबेग्स या पर्स का यूज करती है | इस के स्थान पर आप छोटी साइज के क्लच पर्स या 

पाउच अपने हाथ में रख सकती है | आजकल मार्केट में कई तरह के डिजाईनर पाउच उपलब्ध है | शादी के  

पहनावे के रंग या डिजाईन के अनुरूप आप अपनी पसंद से भी पाउच ले सकती है | यह ट्रेडिशनल पहनावे के 

साथ वेस्टर्न ड्रेस के साथ भी खूब जचता है | 



दीपक 

Sunday, 30 January, 2011

ब्राइडल टिप्स



हैदराबाद की डिजाइनर सुहानी मानती है कि पारंपरिक गहनों की बजाये स्टेटमेंट नैकपीस पहने तो अच्छा होता है | उसमे आपका गला बहुत हेवी सा लगता है और आपको भी कुछ अटपटा सा लगता है तथा आप असहज भी महसूस कर सकते है | उन्होंने हाल में सिल्वर वायर्स, स्टील स्क्वायर्स चेन्स और ब्रोच पिन्स डिजाईन की है, इन सबके इस्तेमाल से आप अलग दिखेगी | 




शादी के दिन सर को ढकना अक्सर जरुरी होता है, ऐसी स्थिति में सगाई के समय या संगीत के समय अच्छा सा हेयरपीस  इस्तेमाल कर सकती है |



दीपक 

Wednesday, 19 January, 2011

ब्राईडल टिप्स




शादी के दिन दुल्हन पर ही सबकी निगाह जाती है | ऐसे में अगर दुल्हन पारंपरिक ड्रेस की बजाये कुछ अलग लुक अपनाये, तो अपने जीवन के उस महत्त्वपूर्ण दिन में वह अच्छी दिखेगी और यादगार भी हो सकती है | 


मुंबई के डिजाइनर वरुणा ने इसी तर्ज पर ब्राइडल कलेक्शन पेश किया है | उनके अनुसार ऐसे गहने जिनमे मन के मुताबिक बदलाव किया जाता है ऐसी ज्वेलरी फायदेमंद होती है व अच्छा विकल्प भी है | आप अपनी शादी में भी थोड़े से बदलाव कर उसे पहन सकते है | आप समय - समय पर अपने मुताबिक इन्ही गहनों में  बदलाव करके पहन सकती है और अलग भी दिख सकती है |     


दीपक 

Saturday, 15 January, 2011

संक्रांति पर विशेष...................................



आपको भी संक्रांति की बहुत बहुत बधाई............................................

भारत में संक्रांति के अलग अलग रूप -
संपूर्ण भारत में मकर संक्रांति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।
हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जलाता है। इस दिन अंधेरा होते ही आग जलाकर अग्नि पूजा करते हुए तिलगुड़चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है। इस सामग्री को तिलचौली कहा जाता है। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की गजकरेवड़ियाँ आपस में बांटकर खुशियां मनाते हैं। बहुएं घर घर जाकर लोकगीत गाकर लोहड़ी मांगती हैं। नई बहू और नवजात बच्चे के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इसके साथ पारंपरिक मक्के की रोटी और सरसों की साग का भी लुत्फ उठाया जाता है।
उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है । इलाहाबाद में यह पर्व माघ मेले के नाम से जाना जाता है। १४ जनवरी से इलाहाबाद मे हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है। १४ दिसम्बर से १४ जनवरी का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। और उत्तर भारत मे तो पहले इस एक महीने मे किसी भी अच्छे कार्य को अंजाम नही दिया जाता था। मसलन शादी-ब्याह नही किये जाते थे पर अब तो समय के साथ लोग काफी बदल गए है। १४ जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से अच्छे दिनों की शुरुआत होती है । माघ मेला पहला नहान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि तक यानी आख़िरी नहान तक चलता है। संक्रान्ति के दिन नहान के बाद दान करने का भी चलन है। बागेश्वर में बड़ा मेला होता है। वैसे गंगास्नान रामेश्वर, चित्रशिला व अन्य स्थानों में भी होते हैं। इस दिन गंगा स्नान करके , तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। इस पर्व पर भी क्षेत्र में गंगा एवं रामगंगा घाटों पर बड़े मेले लगते है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत कोखिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व होता है। इलाहाबाद में गंगायमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है।
महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बांटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं :- `लिळ गूळ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला` अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा मीठा बोलो। इस दिन महिलाएं आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बांटती हैं।
बंगाल में इस पर्व पर स्नान पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहां गंगासागर में प्रतिवर्ष विशाल मेला लगता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। इस दिन गंगासागर में स्नान-दान के लिए लाखों लोगों की भीड़ होती है। लोग कष्ट उठाकर गंगा सागर की यात्रा करते हैं। वर्ष में केवल एक दिन-मकर संक्रांति को यहां लोगों की अपार भीढ़ होती है। इसीलिए कहा जाता है-`सारे तीरथ बार बार लेकिन गंगा सागर एक बार।`
तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल, चौथे व अंतिम दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिए स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है। उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। इस दिन बेटी और जमाई राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।
असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं। राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएं किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं। अत: मकर संक्रांति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।



दीपक 

Saturday, 8 January, 2011

स्मार्ट टिप्स



लड़को का भी चलेगा ब्रांड -


देखा गया है लड़को का डियो व परफ्यूम बहुत स्ट्रांग होता है जबकि लड़कियों का लाइट | पर ये जरुरी तो नहीं कि लड़किया वो ही डियो या परफ्यूम यूज करे जो उनके लिए बना हो | वे बदलाव के लिए बायेज़ डियो भी यूज  कर सकती है | इसका कारण ये होता है कि कुछ लड़कियों को स्ट्रोंग डियो व परफ्यूम पसंद आते है और लड़को के ज्यादातर डियो व परफ्यूम स्ट्रांग होते है जिनकी महक लम्बे समय तक रहती है और उसको लगा कर आप जहाँ से भी जाते है कुछ समय तक उसी जगह पर खुशबू बनी रहती है | इसी कारण आजकल लड़किया भी स्ट्रोंग डियो व परफ्यूम लगा रही है ताकि वे लम्बे समय तक महका करें | 




खास खुशबू वाले दो व परफ्यूम -


नाइकी , ब्लू लेडी, टेमटेशन, ईवा, स्पिन्ज़, प्लेबॉय, यार्डले, रेक्सोना, सिन्थाल, रिया, एक्स, जूलियन, लोमानी, वेनेसा आदि | 


दीपक